‘हिन्दू फाइल्स’ के अंतर्गत हम दुनियाभर में हिंदुओं के विरुद्ध हुए अत्याचारों की कहानियाँ सामने ला रहे हैं। इसी कड़ी में आज गिरिजा टिक्कु की बात करेंगे।
‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म रिलीज होने के बाद देश में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों की चर्चा होनी शुरू हो गई है। वैसे तो इस्लामिक जिहाद के शिकार हुए कश्मीरी पंडितों की सूची बहुत लंबी है लेकिन इसमें गिरिजा टिक्कु का नाम सबसे महत्वपूर्ण है।
गिरिजा की हत्या जिस दर्दनाक तरीके से हुई थी उसे सुनकर भी लोगों की रूह कांप जाती है।
कौन थी गिरिजा टिक्कु?
गिरिजा टिक्कु एक 25 साल की कश्मीरी पंडित महिला थी जो मूलतः बारामुला जिले के अरिगाम नामक गाँव की निवासी थी। वर्तमान में यह गाँव बांदीपुरा जिले में आता है।
गिरिजा कश्मीर घाटी के एक सरकारी स्कूल में लैब सहायक के रूप में काम करती थी। 1990 में जब कश्मीर में हालात खराब होने लगे तो गिरिजा टिक्कु जम्मू चली गई।
उनके परिवार में 60 साल की उनकी माँ, उनके 26 वर्षीय पति, 4 साल का एक बेटा और 2 साल की एक बेटी थी।
क्या हुआ गिरिजा टिक्कु के साथ?
कश्मीर में चल रहे हिन्दू विरोधी दंगों के कारण गिरिजा जम्मू में बस गई थी। हालांकि उसके मन में अपनी मातृभूमि कश्मीर से लगाव अब भी था। इसलिए वह दंगों के शांत होने पर कश्मीर वापस जाने के बारे में सोचती थी।
इसी क्रम में एक दिन फ़िरदौस नाम का एक किशोर युवक उससे मिला जिसे कभी गिरिजा ने स्कूल में पढ़ाया था। फ़िरदौस ने गिरिजा को बताया कि बांदीपुरा के उस स्कूल में बहुत सी शिक्षिकाओं को आज भी आधा वेतन मिल रहा है, जो हालात सामान्य हो जाने पर पहले जैसा हो जाएगा। फ़िरदौस ने गिरिजा को भरोसा दिलाया कि वह वेतन दिलवाने में उसकी मदद कर सकता है।
दंगों में अपना सब कुछ खो चुकी गिरिजा के पास अपने उस छात्र पर विश्वास करने का कोई कारण नहीं था। इसी विश्वास में वह फ़िरदौस के साथ कश्मीर घाटी के लिए रवाना हो गई।
25 जून 1990 का वो दिन जब गिरिजा सड़क पर मिली, लेकिन दो हिस्सों में
जम्मू से गिरिजा 11 जून 1990 को कश्मीर के लिए निकली थी ताकि अपना बचा हुआ वेतन ले सके।
वेतन लेने के बाद वह उसी गाँव के अपने मुस्लिम सहकर्मी से मिलने उसके घर चली जाती है, जहां सेना की वर्दी में आए आतंकियों ने पूरे गाँव के सामने उसका अपहरण कर लिया।
अपहरण के बाद कई दिनों तक गिरिजा के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और अन्य बर्बर तरीकों से उसे प्रताड़ित किया गया। इसके बाद भी जब आतंकियों का मन नहीं भरा तो उसे लकड़ी काटने वाले आरे पर रखकर दो भागों में काट दिया गया।
25 जून 1990 को उसका क्षत विक्षत शरीर सड़क के किनारे मिला। दो हिस्सों में।
गिरिजा को उसके गुप्तांग से होते हुए उसके वक्षों के मध्य से दो हिस्सों में काट डाला गया था। पोस्ट मोर्टम रिपोर्ट में पता चला कि गिरजा के साथ बेहद दुर्दान्त तरीके से बलात्कार किया गया था।
गिरिजा को अपने हिन्दू होने के कारण इतने बर्बर तरीके से मार दिया गया।
गिरिजा टिक्कु अकेली ऐसी हिन्दू महिला नहीं थी जिसके साथ इतने भयानक अत्याचार हुए। बल्कि कश्मीर में ऐसी हजारों महिलायें थी जिनके साथ इसी तरह के बर्बर अपराधों को अंजाम दिया गया और वो भी सिर्फ इसलिए कि कुछ सिरफिरे कश्मीर में निजाम-ए-मुस्तफा लागू करना चाहते थे।
ऐसी हजारों घटनाएं हैं जिनके बारे में शायद हम कभी नहीं जान पाएंगे। मीडिया द्वारा हिंदुओं के साथ होने वाले इस तरह के अपराधों के कभी रिपोर्ट नहीं किया जाता, क्यूंकी ऐसा करने पर किसी की धार्मिक भावनाएं आहात हो सकती हैं या फिर देश के तथाकथित सेकुलर ढांचे को नुकसान पहुँच सकता है।
गिरिजा टिक्कु का परिवार अब कहाँ हैं?
‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के आने के बाद गिरिजा टिक्कु का परिवार अब सामने आया है। गिरिजा का परिवार इस समय अमेरिका में रहता है। गिरिजा की भतीजी सीधी रैना ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस फिल्म को देखकर पूरा परिवार खूब रोया, जबकि इससे पहले हमने सालों तक इस बारे में बात नहीं की थी।
सीधी का कहना है कि उनके परिवार को आज भी न्याय का इंतजार है।
