पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की पोती फातमा भुट्टो निकाह के कराची के महादेव मंदिर पहुंची और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। फातिमा के इस कदम के बाद से ही पाकिस्तान की कट्टरपंथी जमात भड़क गई है और फातिमा भुट्टो की आलोचना कर रही है। हालांकि पाकिस्तान में ही कुछ उदारवादी लोगों ने उनकी सराहना भी की है।
फातिमा भुट्टो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार ली भुट्टो के बेटे मुर्तजा भुट्टो की बेटी है। उन्होंने पिछले शुक्रवार को अपने प्रेमी ग्राहम जिब्रान से शादी की है। इसके बाद रविवार को वह कराची के मशहूर महादेव मंदिर में पहुंची। वहाँ जाकर उन्होंने शिवलिंग पर जल अर्पित किया और भगवान भोलेनाथ की पूजा की। बताया जा रहा है कि फातिमा और उनके पति कराची के इस मंदिर में हिन्दू सिंधियों के सम्मान में पहुंचे थे, जिनकी जड़ें प्राचीन काल से ही कराची से जुड़ी हुई है। इस दौरान फातिमा और उनके पति के साथ पाकिस्तान के कुछ स्थानीय हिन्दू नेता और उनके भाई जुल्फिकार अली भुट्टो जूनियर भी थे। गौरतलब है कि फातिमा के पति ग्राहम ईसाई हैं और अमेरिकी नागरिक हैं।
फातिमा की मंदिर यात्रा के बाद पाकिस्तान में कुछ लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं और उनके इस कदम को सामाजिक सद्भाव का एक उदाहरण बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ इस्लामिक कट्टरपंथियों ने फातिमा के इस कदम का विरोध भी किया है और इसे गैर इस्लामिक करार दिया है। इन कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया है कि एक मुसलमान होने के नाते फातिमा भुट्टो किसी हिन्दू मंदिर में जाकर बुतपरस्ती कैसे कर सकती हैं।
भुट्टो जैसे प्रभावशाली खानदान से होने के बावजूद फातिमा भुट्टो को कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड रहा है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं की क्या स्थिति है। अक्सर ही पाकिस्तान और विशेष तौर पर सिंध से हिंदुओं पर अत्याचार, मंदिरों पर अवैध कब्जे, हिन्दू लड़कियों के अपहरण और जबरन मतांतरण की की खबरें आती रहती हैं। लेकिन इस घटना से यह पुख्ता तौर पर साबित होता है पाकिस्तान में हिन्दू होना किसी अभिशाप से कम नहीं हैं।
