पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओ का उत्पीड़न कोई ढकी छुपी बात नहीं है। आए दिन पाकिस्तान में हिंदुओं को तरह तरह के अत्याचारों का सामना करना पड़ता है और वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वे धर्म से हिंदू हैं।
‘द हिंदू फाइल्स’ की पाकिस्तान सीरीज में आज हम बात कर रहें हैं नौतन लाल की।
नौतन लाल पाकिस्तान के सिंध राज्य के घोटकी क्षेत्र में ‘सिंध पब्लिक स्कूल’ के नाम से एक स्कूल चलाते थे। उनका सपना था कि उनके क्षेत्र के बच्चे पढ़ लिखकर आगे बढ़ें और देश का नाम रौशन करें। वह खुद को एक गर्वित पाकिस्तानी समझते थे और देश के प्रति जिम्मेदारियों को समझते हुए अपने स्कूल में छात्रों को अच्छी से अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाने का प्रयास करते थे।
इसी क्रम में कभी कभी वह अपने छात्रों से सख्ती से भी पेश आते। हालांकि उनकी यही सख्ती आज उनकी जान के लिए खतरा बन गई है, जबकि वह ऐसा सिर्फ अपने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए करते थे।
दरअसल एक दिन अपने स्कूल में पढ़ाते हुए नौतन लाल ने अपने एक छात्र मोहम्मद एहतशाम पर थोड़ी सख्ती बरती। नौतन लाल ने छात्रों को एक पाठ याद करके लाने का होमवर्क दिया था, जो मोहम्मद एहतशाम ने नहीं किया था।
इस पर नौतन लाल ने स्कूल के प्रिंसिपल होने के नाते मोहम्मद एहतशाम को डांट दिया था। बस इसी बात पर ये छात्र नौतन लाल से गुस्सा हो गया और उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगा दिया।
मोहम्मद एहतशाम ने एक वीडियो में नौतन लाल पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। एहतशाम ने दावा किया कि नौतन लाल ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया।
इसके बाद घोटकी में हिंसा भड़क गई और घोटकी निवासियों ने ना केवल नौतन लाल के स्कूल में तोड़ फोड़ कर दी बल्कि आस पास के मंदिरों को भी जमकर नुकसान पहुंचाया।
बाद में स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पाकिस्तान को पुलिस ने नौतन लाल को गिरफ्तार कर लिया और उन पर पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295 (सी) के तहत हिरासत में ले लिया।
पाकिस्तान से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में लेने के बाद नौतन लाल और मोहम्मद एहतशाम से पूछताछ की गई। तब एहतशाम ने आरोपों को पुष्टि भी की कि लाल ने पैगंबर के जीवन और दो पवित्र शहरों के बीच यात्रा पर एक पाठ के दौरान उनका ‘अपमान’ किया था।
हालांकि बाद में जब बात इतना आगे बढ़ गई तो मोहम्मद एहतशाम को अपने किए पर पछतावा हुआ और उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिख कर कबूल किया उसने झूठ बोला था।
एहतशाम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, “नौतन सर ने ऐसा कुछ नहीं बोला था। मुझे तो सिर्फ पाठ याद नहीं था तो उन्होंने मुझ पर थोड़ा गुस्सा किया। फिर मुझे बहुत गुस्सा आया तो मैंने ऐसे ही वीडियो बना दी। मुझे माफ कर दें। मुझे नहीं पता था कि बात इतनी बढ़ जाएगी। नौतन सर मुझे माफ कर दें। प्लीज इस वीडियो को शेयर न करे। यह सब झूठ है।”
हालांकि मोहम्मद एहतशाम के इस कबूलनामें को गंभीरता से लेना पाकिस्तान की एजेंसियों और अदालतों ने जरूरी नहीं समझा और कट्टरपंथियों के दबाव में नौतन लाल को 25 साल जेल की सजा सुना दी। इसके अलावा नौतन लाल पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
आज नौतन लाल पाकिस्तान की जेल में 2019 से विचाराधीन कैदी के रूप में बंद है। उनकी जमानत याचिका भी दो बार खारिज की जा चुकी है।
पाकिस्तान में ईशनिंदा का सहारा लेकर अल्पसंख्यकों, विशेष तौर पर हिंदुओं का उत्पीड़न आम बात है। पाकिस्तानी हिंदू बंटवारे के बाद से ही इस तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम (USCIRF) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों में 1990 से अब तक 75 से अधिक लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है जबकि 40 से अधिक या तो आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं या फिर मौत की कगार पर हैं।
वहीं दूसरी ओर हमारे देश भारत में जब ऐसे उत्पीड़न के शिकार लोगों लिए CAA और NRC जैसे कानून बनाए जाते हैं तो भारतीय लिबरल, वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी जमात के लोग उसका विरोध करते हैं।
