जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का विरोध किया तो गोली मार दी, पूजा कुमारी ने चुकाई पाकिस्तानी हिन्दू होने की कीमत

जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का विरोध किया तो गोली मार दी, पूजा कुमारी ने चुकाई पाकिस्तानी हिन्दू होने की कीमत

हिंदू फाइल्स के अंतर्गत आज हम आपको बता रहे हैं पूजा कुमारी की कहानी। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्कर जिले में रहने वाली पूजा कुमारी दलित हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखती थी।

मार्च 2022 में जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का विरोध करने पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

हत्या के बाद पाकिस्तानी हिंदू समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया, हालांकि पहले के अन्य मामलों की ही तरह इस मामले में भी न्याय मिलने की उम्मीद कम ही है।

कौन थी पूजा कुमारी?

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदुओं की सबसे ज्यादा आबादी रहती है। हालांकि पाकिस्तान के जन्म के साथ ही हिंदुओं की आबादी में लगातार गिरावट आई है, लेकिन अन्य प्रांतों के मुकाबले सिंध में हिंदू सबसे ज्यादा हैं। इनमें भी दलितों की संख्या अधिक है।

ऐसे ही एक दलित साहिब सिंह की सबसे बड़ी बेटी थी पूजा कुमारी।

पूजा के पिता साहिब सिंह ने बीबीसी उर्दू को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पास कभी इतने पैसे नहीं थे कि वो पूजा को पढ़ा पाते। इसलिए पूजा हमेशा घर पर ही रहती थी।

लेकिन वह अपने पिता की मदद करना चाहती थी, इसलिए उसने सिलाई कढ़ाई का काम सीखा। लोग बताते हैं कि उसके हाथों में इतनी सफाई थी कि एक बार उससे काम करवा लेने पर लोग हमेशा उसी के पास आते थे।

इससे पूजा का काम चल निकला और वह ठीक ठाक कमाने लगी थी। आमदनी का एक जरिया मिल जाने के बाद उसने अपनी पांच छोटी बहनों की पढ़ाई का खर्चा भी उठाना शुरू कर दिया था।

पूजा के पिता ने बीबीसी से कहा कि काम शुरू करने के बाद वह उनका सहारा बन गई थी।“मैं बूढ़ा हो गया हूं, लेकिन पूजा की मेहनत ने मुझे ताक़त दे दी थी। मगर अब ऐसा लगता है कि मैं फिर से बूढ़ा हो गया हूं। “

अपहरण का विरोध करने पर गोली मारकर हत्या

पूजा के पड़ोस में ही रहने वाले एक कट्टरपंथी मुस्लिम युवक की काफी समय से पूजा पर नजर थी। वह पूजा के पीछे पड़ा हुआ था और उसका धर्म परिवर्तन कर निकाह करना चाहता था।

इस हत्यारे ने पहले भी भरे बाजार में पूजा के साथ बदतमीजी की थी, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तो की लेकिन उसे जल्द ही जमानत मिल गई। जाहिर है वह इलाके का ताकतवर और रसूखदार व्यक्ति था।

पूजा के एक रिश्तेदार अजय कुमार ने बताया कि घटना वाले दिन आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ पूजा का अपहरण करने की कोशिश की। उस समय पूजा के पिता घर पर नहीं थे।

घटना के समय पूजा सिलाई कर रही थी और उसके हाथ में कैंची थी। वह एक बहादुर लड़की थी, इसलिए उसने अपहरणकर्ताओं का जमकर विरोध किया।

पूजा ने कैंची का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और संभवतः अपहर्ताओं को घायल भी कर दिया। पूजा के इसी विरोध से आहत होकर मुख्य अपहर्ता ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

पुलिस और प्रशासन का कार्रवाई का नाटक

पूजा की हत्या के बाद हिंदू समुदाय के लोगो ने विरोध प्रदर्शन किया और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जो हत्या के बाद से ही फरार था।

हालांकि पुलिस ने तीन में से एक अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पहले के अनेक मामलों की ही तरह इस मामले में भी न्याय मिलने की उम्मीद नजर नहीं आती।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खास तौर पर हिंदुओं के साथ वहां के आम जनमानस तक में नफरतें भरी हुई है और जाहिर है पुलिस भी उसी जनमानस से आती है।

ऐसे में न्याय के लिए कोशिश करना किसी भी हिंदू परिवार के लिए बहुत मुश्किल होता है। कट्टरपंथी मौलानाओं और नेताओं के कारण हिंदू समुदाय का जीवन पाकिस्तान में नारकीय हो चुका है।

ऐसे में जब पाकिस्तानी हिंदुओं का वहां जीवनयापन ही अंगारों पर चलने जैसा है तो न्याय की उम्मीद करना तो बेमानी हैं।

निश्चित है कि पिछले सत्तर साल की हिंदू उत्पीड़न की हजारों घटनाओं की ही तरह ये घटना भी एक कहानी बनकर ही रह जायेगी।