फरीदपुर कैंपेन: जब पाकिस्तानी सेना ने दस हजार से ज्यादा हिंदुओं को चुन चुन कर मारा

फरीदपुर कैंपेन: जब पाकिस्तानी सेना ने दस हजार से ज्यादा हिंदुओं को चुन चुन कर मारा

बांग्लादेश की आजादी के दौरान पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में जिस तरह से अत्याचार और नरसंहार को अंजाम दिया था उनके बारे में जानकर आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। तत्कालीन चुनावों में जीत हासिल करने के बाद भी जब पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व द्वारा शेख मुजीबुर्रहमान को सत्ता हस्तांतरण करने से इंकार कर दिया तो उन्होंने विद्रोह कर दिया और एक नए बांग्ला राष्ट्र की मांग रखी, जिसे आज हम बांग्लादेश के नाम से जानते हैं।

शेख मुजीबुर्रहमान के इस विद्रोह को दबाने के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व ने सैन्य कार्रवाई का सहारा लिया और तब शुरू हुआ बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना का नंगा नाच। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने उन लोगों को चुन चुन कर मारा जो शेख मुजीब का समर्थन कर रहे थे और आजादी की मांग कर रहे थे।

बांग्लादेश सरकार के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस सैन्य अभियान के दौरान लगभग तीस लाख बांग्लादेशियों को पाकिस्तानी सेना द्वारा मार डाला गया, जबकि करोड़ों अन्य विस्थापित होकर भारत चले गए।

पूरी दुनिया इस घटना को बांग्लादेश नरसंहार के नाम से जानती है, लेकिन इस दौरान वहां रहने वाले हिंदुओं की हालत और ज्यादा खराब थी। बांग्लादेशी हिंदुओं ने ना केवल अपने कट्टरपंथी पड़ोसियों के दुर्व्यवहार को झेला बल्कि उन्हें पाकिस्तानी सेना के दमनचक्र का भी सामना करना पड़ा।

इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं पाकिस्तानी सेना के एक अभियान ‘फरीदपुर कैंपेन’ की जिसके दौरान सेना ने दस हजार से ज्यादा हिंदुओं को मार डाला था। हजारों हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार को अंजाम दिया गया और हिंदुओं की संपत्तियों को अपने समर्थकों में बांट दिया गया।

फरीदपुर में पाकिस्तानी सेना ने भयंकर लूटमार को अंजाम दिया। महिलाओं का बलात्कार किया गया, उनकी संपत्ति को लूटा गया, घर जलाए गए। यहां तक कि सेना ने बच्चों को भी नहीं बख्शा।

फरीदपुर में हुए इस नरसंहार के बारे में दुनिया को सबसे पहले अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट से पता चला। न्यूयॉर्क टाइम्स की ये रिपोर्ट 4 जुलाई 1971 को छपी थी जिसमें से साफ तौर पर बताया गया था कि हिंदुओं को चिन्हित करके चुन चुन कर मारा गया।

साधुओं के हत्याकांड से हुई फरीदपुर हिन्दू नरसंहार की शुरुआत 

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये नरसंहार एक व्यवस्थित योजनाबद्ध अभियान था जिसके मूल में ही हिंदुओं का सफाया करना लक्ष्य था। पाकिस्तानी सेना का ये अभियान 12 अप्रैल 1971 को शुरू हुआ जब पाकिस्तानी सेना फरीदपुर में घुसी थी।

फरीदपुर पहुंचने के बाद पाकिस्तानी सेना जब स्थानीय गोलमाचोट इलाके में पहुंची तो वहां के एक आश्रम में भजन कीर्तन चल रहा था। सेना ने आश्रम को चारो तरफ से घेर लिया। इसके बाद वहां मौजूद श्रद्धालु और साधु आश्रम से निकल गए। लेकिन 9 साधुओं ने आश्रम से जाना अस्वीकार कर दिया।

सेना इन 9 साधुओं को खींचकर बाहर लाई और एक लाइन में खड़ा कर दिया गया। इनमें से एक साधु नबकुमार ब्रह्मचारी किसी तरह से बचने में सफल रहे। नबकुमार ने बाद में बताया कि पाकिस्तानी सेना ने उन सभी साधुओं को एक एक करके गोलियों से भून डाला था। उनके अनुसार सभी साधुओं ने ‘जय जगतबंधु हरि’ का उद्घोष करते हुए अपने प्राण त्याग दिए।

इस घटना को इतिहास में श्री आंगन हत्याकांड के नाम से जाना जाता है जो कि फरीदपुर में हिंदुओं के नरसंहार की शुरुआत थी।

हिंदुओं को अन्य समुदायों के मुकाबले ज्यादा खतरे का सामना करना पड़ रहा था

न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि बांग्लादेश में सैन्य अभियान के दौरान उन सभी लोगों को पाकिस्तानी सेना से खतरा था जो बांग्लादेश की मुक्ति का समर्थन कर रहे थे और शेख मुजीब के समर्थक थे।

हालांकि इस दौरान हिंदुओं को दोहरे खतरे का सामना करना पड़ रहा था। पाकिस्तान ये मान कर चल रहा था कि बांग्लादेश में जारी विद्रोह को भारत का समर्थन है और वे हिंदुओं को भारत के जासूस के तौर पर देखते थे। इसलिए सेना सीधे तौर पर हिंदुओं को निशाना बना रही थी।

वहीं दूसरी ओर हिंदुओं को मुस्लिम कट्टरपंथियों का भी सामना करना पड़ रहा था, जो पाकिस्तानी सेना को उनके ठिकानों की जानकारी दे रहे थे।

पहचान के लिए हिंदुओं की संपत्तियों को चिन्हित किया गया

न्यूयॉर्क टाइम्स अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि सैन्य अभियान के दौरान मुस्लिमों और ईसाइयों ने अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अपनी पहचान के लिए किया ताकि पाकिस्तानी सेना उन्हें निशाना ना बनाए। मुस्लिमों ने इसके लिए अपनी संपत्तियों पर अपनी पहचान लिखी थी तो ईसाइयों ने भी अपने घरों और दुकानों पर क्रॉस स्थापित कर दिए थे। ईसाई तो अपने कपड़ों में भी लाल धागों से क्रॉस सिलवाने लगे थे।

लेकिन हिंदुओं की पहचान खुद पाकिस्तान की सेना कर रही थी और सेना ने हिंदू घरों पर पीले रंग में बड़े अक्षरों में ‘H’ लिखा था। इससे पाकिस्तानी सेना को हिंदू घरों की पहचान में आसानी होती और वह चुन चुन कर हिंदुओं को मारती गई।

दस हजार से ज्यादा हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया गया

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने इस सैन्य अभियान में लगभग दस हजार हिंदुओं को मार डाला। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। मारे गए हिंदुओं में हर आयु वर्ग के लोग बच्चे, बूढ़े और नौजवान शामिल थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में कई हिंदुओं के बयान दर्ज किए गए जो उन पर हुए अत्याचारों की कहानी बयां करते हैं।

हिंदुओं की जानकारी देने के लिए नियुक्त किए थे एजेंट्स

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि फरीदपुर कैंपेन के दौरान हिंदुओं की जानकारी देने के लिए सेना ने गांवों में अपने एजेंट्स नियुक्त किए थे।

पाकिस्तानी सेना गांवों में घुसकर हिंदुओं के घरों के बारे में पूछताछ करती थी और उसके बाद उन्हें मार डाला जाता था। वहीं हिंदुओं के घरों और दुकानों को आग लगा दी जाती।

इसके अलावा वो लोग जो हिंदुओं की जानकारी पाकिस्तानी सेना को मुहैया करवाते थे, उन्हें भी हिंदुओं की संपत्ति इनाम के रूप में दी जाती थी।

इस रिपोर्ट में यहां तक बताया गया है कि पाकिस्तानी सेना ना केवल खुद इस नरसंहार में शामिल थी, बल्कि उसने कई अन्य समूहों को भी हिंदुओं को मारने के लिए हथियार मुहैया करवाए थे।

धर्मांतरण के आश्वासन के बाद भी हिंदुओं को जिंदा जला दिया गया

न्यूयॉर्क टाइम्स अपनी रिपोर्ट में एक घटना का जिक्र विशेष रूप से करता है। इस घटना में फरीदपुर के एक केंद्रीय चौक पर दो हिंदुओं का सर काट दिया गया और उनके शरीर को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया।

इसके बाद वहां मौजूद हिंदुओं ने अपनी जान बचाने के लिए इस्लाम में धर्मांतरित होने की भीख मांगी। लेकिन इसका पाकिस्तानी सेना पर कोई असर नहीं पड़ा और लगभग सभी मौजूद हिंदुओं को गोली मार दी गई।

हिंदुओं के मित्र बांग्ला मुसलमानों को भी उन्हें मारने के लिए मजबूर किया गया

पाकिस्तानी सेना ने अपना वीभत्स चेहरा दिखाते हुए मुसलमान बांग्लादेशियों को अपने ही हिंदू मित्रों को मारने और उनकी संपत्ति व महिलाएं लूटने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तानी सेना ने धमकी दी कि अगर इन लोगों ने हिंदुओं को नहीं मारा तो ये खुद मारे जायेंगे।

इसके बाद फरीदपुर क्षेत्र में मध्यमपारा, ईशानगोपालपुर, सेंदिया, चारभद्रासन जैसे इलाकों में हिंदुओं का नरसंहार किया गया। इन इलाकों की लगभग पूरी हिंदू आबादी समाप्त कर दी गई।

इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस अभियान के बाद फरीदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हिंदुओं की 90 प्रतिशत आबादी समाप्त हो गई, जबकि यह बांग्लादेश का एक हिंदू बहुल इलाका हुआ करता था।

विडंबना ये है कि बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान बड़े पैमाने पर हुए अत्याचारों के कारण हिंदुओं के इस नरसंहार को इतिहास में कहीं भुला दिया गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट, जिस पर यह आर्टिकल आधारित है, उसे पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

New York Times: Hindus Are Targets of Army Terror in an East Pakistani Town