सुरेंद्र रैना ने बयां किया दर्द, भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान जहन्नुम हो जाती थी कश्मीरी पंडितों की जिंदगी

सुरेंद्र रैना ने बयां किया दर्द, भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान जहन्नुम हो जाती थी कश्मीरी पंडितों की जिंदगी

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रिलीज होने के बाद से ही हर रोज कश्मीरी पंडितों की नई नई कहानियां सामने आ रही हैं। कश्मीरी पंडित भी सामने आकर अपनी कहानियां बयान कर रहे हैं कि उन्होंने 1990 में इस्लामिक जिहाद के दौरान कश्मीर में क्या क्या झेला।

इसी क्रम में जम्मू के दुर्गानगर में रह रहे कश्मीरी पंडित सुरेंद्र कुमार रैना ने भी अपना दर्द साझा किया है।

हिंदी अखबार अमर उजाला से बात करते हुए सुरेंद्र रैना ने बताया कि टीका लाल टपलू की हत्या के बाद से जिहादियों के मंसूबे इतने बढ़ गए कि वे चुन चुन कर पंडितों को मारने लगे।

सुरेंद्र रैना याद करते हैं कि कश्मीर के हालात 1975 से ही खराब होना शुरू हो गए थे, लेकिन 1985 के बाद कश्मीर में हिंदुओं का रहना दुभर कर दिया गया।

रैना बताते हैं कि सबसे ज्यादा मुश्किल तब होती थी जब भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट का मैच होता था। मैच में भारत जीते या हारे, कश्मीरी पंडितों का जीना मुश्किल कर दिया जाता था। उनसे जबरन चंदा वसूला जाता था ताकि जश्न मनाया जा सके।

इसके अलावा पाकिस्तान के हारने की स्थिति में कश्मीरी पंडित लड़कियों पर फब्तियां कसी जाती थी। इस दौरान पंडितों के घरों पर पत्थरबाजी भी आम थी।

हालात इतने खराब हो गए थे कि सरकारी नौकरी करने वाले कश्मीरी पंडितों का दफ्तर जाना दुभर हो गया था।

टीका लाल टपलू की हत्या के बाद से बिगड़ती चली गई स्थिति

सुरेंद्र रैना के मुताबिक टीका लाल टपलू एक देशभक्त भारतीय थे और वो राष्ट्रवादी-हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए थे। यही कारण था कि टपलू आतंकियों को खटकने लगे थे।

उनकी हत्या के बाद से ही कश्मीर में हिंदुओं की टारगेट किलिंग की शुरुआत हुई थी। इसके लिए जिहादी आतंकियों ने एक हिटलिस्ट तैयार की थी जिसमें घाटी की महत्वपूर्ण हिंदू शख्सियतों को शामिल किया गया था।

1990 आते आते आतंकियों ने कश्मीर में खुलेआम रैलियां निकालकर हिंदुओं को धमकाना शुरू कर दिया था। ये जिहादी आतंकी हिंदुओं को घाटी छोड़ने या इस्लाम कबूल करने की धमकियां दिया करते थे।

सुरेंद्र कुमार रैना कश्मीर में हिंदुओं के साथ घटी इन घटनाओं को याद करते हुए द कश्मीर फाइल्स बनाने के लिए विवेक अग्निहोत्री का धन्यवाद करते हैं। उनकी सरकार से मांग है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी सुनिश्चित की जाए और उन्हे उनकी जमीनों पर अधिकार वापस दिलाए जाएं।