नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

10 अक्तूबर का दिन हिंदुओं के लिए किसी काले दिन से कम नहीं है। यही वो दिन है जब 1946 में वर्तमान बांग्लादेश और तत्कालीन संयुक्त बंगाल के नोआखली में हिंदुओं का वीभत्स नरसंहार अंजाम दिया गया था।

नोआखली नरसंहार की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दंगो के शुरुआती 72 घंटो में ही 6000 से ज्यादा हिंदुओं को काट डाला गया था, जबकि 4 लाख से ज्यादा हिंदू आबादी को बलात इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया गया। अगले एक सप्ताह में क्षेत्र की 95 प्रतिशत हिंदू आबादी को समाप्त कर दिया गया।

संभवतः यह आधुनिक काल में हिंदुओं का सबसे भयानक दंगा था, जिसकी पृष्ठभूमि में मोहम्मद अली जिन्ना की डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा थी।

नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

क्या हुआ था उस दिन नोआखली में?

नोआखली संयुक्त बंगाल का एक मुस्लिम बहुल इलाका हुआ करता था। हालांकि वहां हिंदुओं की भी अच्छी खासी तादाद थी। 10 अक्तूबर 1946 के दिन स्थानीय हिंदू भरी संख्या में कोजागरी लक्ष्मी पूजा के लिए नोआखली में एकत्रित हुए थे, कि अचानक मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।

यह हमला इतनी तीव्रता से किया गया था कि हिंदुओं को संभलने तक का मौका नहीं मिल पाया और देखते ही देखते वहां मौजूद सभी हिंदू काट डाले गए। जाहिर है मुस्लिम भीड़ इस दंगे के लिए पहले से तैयार थी।

इन दंगो को भड़काने में सबसे बड़ा हाथ स्थानीय मुस्लिम नेता सरवर हुसैनी का माना जाता है। वह शुरुआत से ही मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ भड़का रहा था। उसके भड़काऊ भाषणों से प्रभावित होकर ही मुस्लिमों ने हिंदुओं को मारना शुरू कर दिया।

हुसैनी के भाषणों से प्रभावित कट्टर मुस्लिमों ने 12 अक्तूबर कोई स्वतंत्रता सेनानी चितरंजन दत्त रायचौधरी के घर पर हमला कर दिया और उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। एक अन्य स्वतंत्रता सेनानी लालमोहन सेन का घर लूट लिया गया और इसी लूटपाट में उनकी भी हत्या कर दी गई। दंगाइयों ने उनका घर भी ढहा दिया था।

नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

13 अक्तूबर को धारदार हथियारों से लैस कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ ने चंगीर गांव पर हमला कर दिया। गांव के हिंदू घरों को आग लगा दी गई। सभी पुरुषों को काट डाला गया और उनकी स्त्रियों के साथ बलात्कार किए गए। अनेकों को बलात इस्लाम कबूल करवाया गया तो कइयों के निकाह जबरन उन्हीं दंगाइयों से कर दिए गए जिन्होंने उनके पतियों और बच्चों की हत्या की थी।

तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जे बी कृपलानी अपने संस्मरण में लिखते हैं,

“हमने वहां सुना कि एक हिंदू लड़की आरती सूर का जबरदस्ती मुस्लिम लड़के से निकाह करवा दिया गया। वह पंचघडिया गांव की थी। सुचेता ने उसका नाम नोट किया और स्थानीय मजिस्ट्रेट को इसकी जानकारी दी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस तरह की शादियां लड़की की मर्जी से हो रही है।

यह सुनते ही सुचेता कृपलानी भड़क गई और मजिस्ट्रेट को चुनौती दी। बाद में मजिस्ट्रेट ने उस लड़की छुड़वाया और उसके मां बाप के साथ कलकत्ता भेज दिया ताकि वह सुरक्षित रहे।”

जे बी लिखते हैं कि संगठित और हथियार बंद झुंड निकलते थे और हिंदू घरों को घेर लेते थे। पहले ही झटके में जो जमींदार परिवार थे, उन पर कहर ढाया गया और उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया। मौलाना और मौलवी झुंड के साथ चलते थे। जहां भेद का काम खत्म हुआ वहां ये मौलाना और मौलवी हिंदुओं को धर्मांतरित करवाते। गांवों में कुरान के कलाम और आयतें सिखाने के लिए कक्षाएं चलायी जाती थी।

अगले एक सप्ताह कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ का आतंक का नंगा नाच इसी तरह चलता रहा। इस दौरान सैकड़ों हजारों हिंदुओं का कत्ल किया गया। हजारों महिलाओं का बलात्कार किया गया और उनके जबरन निकाह दंगाइयों से करवा दिए गए। हिंदुओं को जबरदस्ती गायों को मारने और गोमांश खाने के लिए मजबूर किया गया।

नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

इसके अलावा अनेकों हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं अंजाम दी गई। इनमें बहुत से ऐसे मंदिर भी थे जो सैकड़ों साल पुराने थे। दंगाइयों ने इन मंदिरों में मौजूद हिंदू मूर्तियों तक पर बर्बरता का प्रदर्शन किया। कई मूर्तियों के सर धड़ से अलग कर दिए गए।

अगले कई दिनों तक नोआखली की सड़कें हिंदुओं की लाशों से पटी पड़ी थी, जिन्हे गिद्ध चील और कौवे खा रहे थे। इसके अलावा अनगिनत शवों को हुगली नदी में फेंक दिया गया था। बहुत से ऐसे थे जिनका उनके परिवारों ने चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया था। स्पष्ट है दंगों में मारे गए हिंदुओं की सही संख्या का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

नोआखली नरसंहार: 72 घंटो में 6000 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या, 4 लाख से ज्यादा का बलात धर्मांतरण और क्षेत्र की 85 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या का सफाया

प्रशासन ने दंगो को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। खुफिया जानकारियों से इन दंगो की आहट महसूस की जा सकती थी, लेकिन संयुक्त बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री शहीद सोहरावर्दी ने इन सूचनाओं को ना केवल नजरंदाज किया, बल्कि कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि सोहरावर्दी ने जानबूझकर इन घटनाओं को नहीं रोका। वह मुस्लिम लीग के नेता थे और ये दंगे मुस्लिम लीग के ही नेता मोहम्मद अली जिन्ना की डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा के तहत ही हो रहे थे।

16 अक्तूबर 1946 के अपने संस्करण में मशहूर अखबार ‘द स्टेट्समैन’ लिखता है,

“लगभग 200 वर्ग मील के क्षेत्र में दंगाइयों की भीड़ से घिरे निवासियों का नरसंहार किया जा रहा है, उनके घरों को जलाया जा रहा है, उनकी महिलाओं को जबरन ले जाया जा रहा है और हजारों का जबरन धर्म परिवर्तन किया जा रहा है। हजारों गुंडों ने गांवों पर हमला किया, उन्हें (हिंदुओं को) अपने मवेशियों को मारने और खाने के लिए मजबूर किया गया। प्रभावित गांवों में सभी पूजास्थलों को अपवित्र कर दिया गया है। नोआखली के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।”